जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए घर से निकले ग्रामीण! एसईसीएल की जनसुनवाई निरस्त करने की मांग ! चार सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन!
रायगढ़। जिले के आदिवासी बाहुल तमनार क्षेत्र में प्रस्तावित एसईसीएल कोल माइंस परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। सोमवार को प्रभावित ग्राम पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर 8 जून 2026 को ग्राम पेलमा में प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व, संस्कृति और जीवन से जुड़ा मुद्दा है। तमनार क्षेत्र के आदिवासी और ग्रामीण समुदाय पीढ़ियों से जल, जंगल और जमीन पर निर्भर हैं। खेती-किसानी, वन उपज और प्राकृतिक संसाधन ही उनकी आजीविका का आधार हैं। ऐसे में कोयला खनन परियोजना आने से उनकी कृषि भूमि, वन क्षेत्र और पारंपरिक जीवनशैली पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
चार सूत्रीय मांग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि परियोजना से प्रभावित किसानों, भूमिहीन परिवारों और आदिवासी समुदायों की रोजगार, पुनर्वास और मुआवजे से संबंधित मांगों का अब तक समाधान नहीं किया गया है। उनका कहना है कि जब तक प्रत्येक एकड़ भूमि के बदले स्थायी रोजगार, सभी प्रभावित परिवारों को समान मुआवजा, भूमिहीनों को रोजगार में प्राथमिकता और पुनर्वास नीति को लिखित रूप में लागू करने की गारंटी नहीं दी जाती, तब तक जनसुनवाई का कोई औचित्य नहीं है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो वे प्रस्तावित जनसुनवाई का विरोध जारी रखेंगे। उनका कहना है कि विकास के नाम पर आदिवासी समाज को उसकी जमीन और जंगलों से बेदखल नहीं किया जा सकता।वहीं प्रशासन ने ग्रामीणों का ज्ञापन प्राप्त कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

EDITOR VS KHABAR
