गेरवानी में शांभवी इस्पात विस्तार के खिलाफ जनआक्रोश, जनसुनवाई का विरोध

रायगढ़ :- गेरवानी क्षेत्र में प्रस्तावित शांभवी इस्पात उद्योग के विस्तार को लेकर स्थानीय नागरिकों, किसानों एवं सामाजिक संगठनों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। आगामी 21 अप्रैल को आयोजित होने वाली जनसुनवाई का क्षेत्रवासियों ने पुरजोर विरोध करने का निर्णय लिया है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि गेरवानी एवं आसपास का क्षेत्र पहले से ही अनेक उद्योगों के कारण गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में एक और उद्योग का विस्तार क्षेत्र के पर्यावरण संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ सकता है।
विरोध के प्रमुख कारण बताते हुए क्षेत्र के वरिष्ठ नेता पितरु मालाकार ने कहा कि पहले से संचालित उद्योगों के कारण वायु, जल एवं भूमि प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुँच चुका है। इस्पात संयंत्र के विस्तार से प्रदूषण और बढ़ेगा, जिससे जनस्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्र की कृषि भूमि लगातार प्रभावित हो रही है, भूजल स्तर गिर रहा है तथा जल स्रोत दूषित हो चुके हैं, जिससे किसानों की आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है। धूल, धुआं एवं रासायनिक उत्सर्जन के कारण श्वास संबंधी बीमारियां, त्वचा रोग एवं अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
इसी कड़ी में जनसुनवाई निरस्त करने की मांग रखते हुए पितरु मालाकार ने कहा कि लाखा, गेरवानी एवं तराईमाल की सड़कें अब और औद्योगिक भार सहने की क्षमता नहीं रखतीं। इन मार्गों पर भारी वाहनों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें क्षेत्रवासी अपने परिचितों को खो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सही आंकड़े एकत्र किए जाएं तो स्थिति बेहद चिंताजनक है—इस मार्ग पर सालाना औसतन सैकड़ों लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में जा रही है, जो किसी भी दृष्टि से अत्यंत गंभीर विषय है। ऐसे हालात में स्कूली बच्चों का सुरक्षित आवागमन भी दूभर हो गया है।
पितरु मालाकर ने कहा कि गेरवानी क्षेत्र पहले ही अत्यधिक औद्योगिक भार झेल रहा है। लगातार नए उद्योगों की स्थापना से क्षेत्र की प्राकृतिक एवं सामाजिक संरचना पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उद्योगों द्वारा रोजगार के नाम पर स्थानीय युवाओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि प्रदूषण और अन्य समस्याओं का खामियाजा क्षेत्रवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
पितरु मालाकर सहित क्षेत्रीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जनसुनवाई को निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से आयोजित किया जाए तथा स्थानीय जनता की आपत्तियों को गंभीरता से लिया जाए। साथ ही, जब तक पर्यावरणीय प्रभावों का समुचित आकलन एवं समाधान नहीं होता, तब तक इस्पात संयंत्र के विस्तार पर तत्काल रोक लगाई जाए।
अंत में पितरु मालाकार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि क्षेत्रवासियों की मांगों की अनदेखी की गई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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