युवा संगठन, घरघोड़ा ने उठाई संयुक्त जांच की मांग, कहा—जांच के बिना जनसुनवाई स्वीकार नहीं, जरूरत पड़ी तो होगा विरोध प्रदर्शन
रायगढ़,घरघोड़ा। ग्राम चारमार–भेंगारी–नवापारा में B.S. Sponge Iron Pvt. Ltd. की प्रस्तावित/संबंधित औद्योगिक परियोजना को लेकर विवाद अब खुलकर सामने आने लगा है। युवा संगठन, घरघोड़ा ने एसडीएम घरघोड़ा को विस्तृत आवेदन सौंपकर भूमि रिकॉर्ड, पर्यावरणीय स्वीकृतियों, प्रदूषण नियंत्रण, जल उपयोग, भारी वाहनों की आवाजाही, सड़क सुरक्षा और ग्रामीण हितों से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की तत्काल एवं निष्पक्ष जांच की मांग की हैl

संगठन का कहना है कि 28 सितंबर 2026 को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई से पहले संबंधित भूमि और परियोजना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। संगठन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ग्रामीणों की आपत्तियों और दस्तावेजी सवालों को नजरअंदाज कर जनसुनवाई को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बनने दिया जाएगा।

खसरा नंबर 86 की 1979 से अब तक जांच की मांग
युवा संगठन ने विशेष रूप से खसरा नंबर 86 एवं उससे जुड़े उप-खसरों की वर्ष 1979 से वर्तमान तक की संपूर्ण राजस्व श्रृंखला की जांच की मांग की है।


संगठन ने बंटवारा, फौती, नामांतरण, हस्तांतरण, विक्रय और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की जांच तथा पुराने राजस्व अभिलेखों का वर्तमान रिकॉर्ड से मिलान कराने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि भूमि संबंधी सभी तथ्यों के स्पष्ट होने तक परियोजना से जुड़े विवादित बिंदुओं पर प्रशासन को जल्दबाजी में आगे नहीं बढ़ना चाहिए।
पर्यावरणीय स्वीकृतियों से लेकर प्रदूषण नियंत्रण तक जांच की मांग

आवेदन में परियोजना से संबंधित Environmental Clearance, Consent to Establish, Consent to Operate तथा अन्य आवश्यक वैधानिक अनुमतियों की जांच की मांग की गई है।
इसके साथ ही उत्पादन क्षमता, प्रदूषण नियंत्रण उपकरण, जल उपयोग, ETP, औद्योगिक अपशिष्ट, Fly Ash, Slag, Green Belt, Air-Water-Soil Quality Monitoring, Noise Pollution और Fire Fighting System की मौके पर भौतिक जांच कराने की मांग की गई है।

युवा संगठन ने सवाल उठाया है कि केवल कागजों में व्यवस्थाएं दर्ज होना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को मौके पर जाकर यह भी देखना चाहिए कि दस्तावेजों में दर्ज व्यवस्थाएं वास्तव में जमीन पर मौजूद और प्रभावी हैं या नहीं।
भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी विरोध
संगठन ने प्रस्तावित/संबंधित औद्योगिक गतिविधियों से बढ़ने वाली भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर ग्रामीणों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है।

ग्रामीण आबादी, स्कूल, बाजार और मुख्य सड़कों पर भारी वाहनों के संभावित प्रभाव को देखते हुए परिवहन मार्ग, पार्किंग व्यवस्था, सड़क रखरखाव, दुर्घटना एवं जाम की रोकथाम तथा धूल नियंत्रण के लिए पानी छिड़काव जैसी व्यवस्थाओं की जांच की मांग की गई है।
संयुक्त विभागीय टीम से मौके पर जांच की मांग
युवा संगठन ने राजस्व विभाग, पर्यावरण/प्रदूषण नियंत्रण विभाग, जल संसाधन विभाग, सड़क विभाग, पुलिस प्रशासन एवं अन्य संबंधित विभागों की संयुक्त टीम गठित कर मौके पर निरीक्षण कराने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि दफ्तर में बैठकर फाइलों की जांच करने के बजाय दस्तावेजों और जमीन की वास्तविक स्थिति का आमने-सामने मिलान होना चाहिए।
कंपनी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की चेतावनी
युवा संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि 28 सितंबर की जनसुनवाई से पहले उठाए गए सवालों पर निष्पक्ष जांच नहीं होती, संबंधित रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं किए जाते और ग्रामीणों की आपत्तियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता है, तो संगठन कंपनी की प्रस्तावित परियोजना के विरोध में लोकतांत्रिक एवं वैधानिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करेगा।
संगठन ने कहा है कि विरोध का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बिगाड़ना नहीं, बल्कि ग्रामीणों के भूमि अधिकार, पर्यावरण, जल, कृषि, सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक हित से जुड़े सवालों को प्रशासन के सामने मजबूती से रखना है।
“विकास के नाम पर ग्रामीणों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होने देंगे”—जने कुर्रे
युवा संगठन घरघोड़ा रायगढ़ के अध्यक्ष जने कुर्रे ने कहा—
“चारमार, भेंगारी और नवापारा की भूमि तथा B.S. Sponge Iron Pvt. Ltd. से जुड़े मामले में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी। 28 सितंबर की जनसुनवाई से पहले खसरा नंबर 86 एवं उससे जुड़े सभी उप-खसरों की वर्ष 1979 से वर्तमान तक की पूरी राजस्व श्रृंखला की निष्पक्ष और दस्तावेजी जांच होनी चाहिए।
भूमि का बंटवारा, नामांतरण, फौती, हस्तांतरण और विक्रय किस आधार पर हुआ, इसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होना चाहिए। यदि जांच में किसी दस्तावेजी विसंगति या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
हम केवल कागजी जांच नहीं चाहते। पर्यावरण, प्रदूषण, जल, सड़क, भारी वाहनों की आवाजाही और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़े सभी बिंदुओं की मौके पर संयुक्त जांच जरूरी है।
यदि प्रशासन हमारी मांगों को गंभीरता से नहीं लेता और जनसुनवाई को महज औपचारिकता बनाने का प्रयास होता है, तो युवा संगठन ग्रामीणों के साथ मिलकर कंपनी की परियोजना के विरोध में लोकतांत्रिक एवं वैधानिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करेगा।
हमारा सवाल सीधा है—पहले भूमि और पर्यावरण से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लिया जाए। विकास का विरोध नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर ग्रामीणों की भूमि, पर्यावरण, जल और सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगा। प्रशासन निष्पक्ष जांच कराए और उसकी रिपोर्ट एवं कार्रवाई की जानकारी ग्रामीणों के सामने रखे।”»

EDITOR VS KHABAR
