19 वर्षों से जारी है शिक्षक दिवस पर सम्मान की अनूठी परंपरा, तृतीय वर्ग कर्मचारी भवन का भी हुआ लोकार्पण
तमनार। शिक्षक दिवस के अवसर पर तमनार के मंगलम भवन में गुरुजनों और वरिष्ठ कर्मचारियों के सम्मान का भव्य आयोजन किया गया। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत करीब 500 सेवानिवृत्त एवं सेवारत शिक्षक तथा पेंशनर कर्मचारियों का सम्मान तिलक-रोली, माल्यार्पण, श्रीफल, शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया। समारोह में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, भाजपा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत भारत के महान शिक्षाविद एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। अतिथियों ने डॉ. राधाकृष्णन के शिक्षा एवं राष्ट्र निर्माण में योगदान को स्मरण करते हुए गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
गुरु का सम्मान भारतीय संस्कृति की पहचान
समारोह की मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री सुनीति सत्यानंद राठिया ने सभी शिक्षक-कर्मचारियों एवं उपस्थितजनों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने गुरुजनों का चरण वंदन करते हुए कहा कि समाज में शिक्षक की भूमिका केवल बच्चों को पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य को दिशा देने का कार्य करता है।

उन्होंने कहा कि सैकड़ों गुरुजनों और कर्मचारियों का सम्मान करना उनके लिए गौरव और सौभाग्य की बात है। वरिष्ठ शिक्षकों एवं कर्मचारियों का अनुभव आने वाली पीढ़ी के लिए अमूल्य मार्गदर्शन है। समाज को ऐसे अनुभवों और ज्ञान का लाभ निरंतर मिलता रहना चाहिए।
2007 से चली आ रही सम्मान की परंपरा
तमनार में शिक्षक दिवस पर गुरुजनों और कर्मचारियों के सम्मान की यह परंपरा वर्ष 2007 से लगातार जारी है। 19 वर्षों से आयोजित हो रहे इस आयोजन ने क्षेत्र में वरिष्ठजनों एवं शिक्षा जगत के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत किया है।
समारोह में सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों के साथ वर्तमान में सेवाएं दे रहे शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। लंबे समय तक शिक्षा और शासकीय सेवा के माध्यम से समाज को योगदान देने वाले वरिष्ठजनों का सम्मान समारोह का विशेष आकर्षण रहा।

तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी भवन का लोकार्पण
इसी अवसर पर छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण भी किया गया। भवन के उपलब्ध होने से कर्मचारी संगठनों की बैठक, सामाजिक गतिविधियों एवं कर्मचारी हित से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों के संचालन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

गुरु सम्मान के साथ सामाजिक सरोकार का संदेश
समारोह में भाजपा के जिला एवं मंडल पदाधिकारी, वरिष्ठ कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, मातृशक्ति, युवाशक्ति तथा क्षेत्र के विशिष्ट नागरिकों की उपस्थिति रही। राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की मौजूदगी के बीच कार्यक्रम का केंद्रबिंदु पूरी तरह शिक्षा, गुरुजनों और वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान पर रहा।
कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि शिक्षक का सम्मान केवल एक दिन श्रीफल और शॉल भेंट करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने, विद्यालयों में संसाधन उपलब्ध कराने, शिक्षकों को बेहतर कार्य वातावरण देने और नई पीढ़ी में गुरुजनों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने की दिशा में भी समाज को निरंतर प्रयास करना चाहिए।
तमनार में 19 वर्षों से जारी यह आयोजन इसी सामाजिक भावना को आगे बढ़ाने का माध्यम बन रहा है। समारोह में वर्तमान एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों-कर्मचारियों का सम्मान कर उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।


समापन संदेश के रूप में यही भावना उभरकर सामने आई कि गुरु का सम्मान केवल व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, अनुभव और उस पूरी परंपरा का सम्मान है, जिसके आधार पर समाज और राष्ट्र की नई पीढ़ी तैयार होती है।

EDITOR VS KHABAR
