तमनार विकासखंड के अंतर्गत आने वाला पालीघाट गांव आज पूरे क्षेत्र में अपनी निस्वार्थ युवा टीम के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। जहाँ कई बार सरकारी व्यवस्था और विभागीय जिम्मेदारी देर करती है, वहाँ इस गांव के युवाओं ने अपने हौसले और जिम्मेदारी की भावना से वह सब कर दिखाया है जो किसी भी संगठित संस्था से अपेक्षित होता है।

सड़क पर बड़े बड़े गड्ढे
हाल ही में हमीरपुर–पालीघाट–रायगढ़ मुख्य मार्ग के भालूपानी घाट के नीचे बीच सड़क पर एक बड़ा और खतरनाक गड्ढा बन गया था। पिछले कई महीनों से इस गड्ढे के कारण दोपहिया और चारपहिया वाहनों के अनेक दुर्घटनाएं हो चुकी थीं। ग्रामीणों ने बार-बार विभाग का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
आख़िरकार, पालीघाट के युवाओं ने स्वयं पहल करते हुए पत्थर और गिट्टी डालकर सड़क को चलने योग्य बनाया, जिससे राहगीरों और ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली।
इस कार्य में हरी चौहान, आंसू सिदार, शैलेश चौहान, डमरूधर निषाद, तथा विशेष रूप से बबलू नायक, अंकित मिश्रा और नरेश राठिया की अहम भूमिका रही। युवाओं ने न केवल गड्ढा भरा बल्कि भविष्य में ऐसे हादसे न हों इसके लिए मार्ग को समतल करने तक की मेहनत की।
यह पहली बार नहीं है जब पालीघाट की यह युवा टीम सुर्खियों में आई हो।

जंगलों में आग लगने पर, जब वन अमला मौके पर नहीं पहुँच पाया, तब इन युवाओं ने अपने दम पर घंटों मेहनत कर आग पर काबू पाया, जिससे कई हेक्टेयर जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रहे।
कुएँ में गिरे जंगली भालूओं को बचाने का अभियान भी इन युवाओं ने बेहद जोखिम उठाकर किया — बिना किसी सरकारी उपकरण के रस्सों की मदद से कई घंटे तक चले इस रेस्क्यू अभियान में भालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
जंगली सूअरों के शिकार करने वालों के कई प्रयासों को असफल करने में भी इन युवाओं ने साहस दिखाया और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में जागरूकता फैलाई।
बरसात के दिनों में जब रास्तों पर पेड़ गिरने या मिट्टी धंसने से घंटों जाम लग जाता है, तब यही टीम सबसे पहले फावड़ा, कुल्हाड़ी और रस्सी लेकर मौके पर पहुँचती है और रास्ता साफ़ करती है।
बिजली की खराबी और ट्रांसफॉर्मर की गड़बड़ी जैसी समस्याओं में भी ये युवा रात-दिन प्रशासन को सूचना देने के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा का ध्यान रखते हैं।
इन कार्यों के कारण पालीघाट की यह टीम तमनार विकासखंड में जनसेवा की पहचान बन चुकी है। इनकी सक्रियता और निस्वार्थ भावना के चलते गांव के लोग इन्हें “पालीघाट सेवा दल” के नाम से भी पुकारते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है —
“इन युवाओं को कोई पद नहीं, कोई वेतन नहीं, फिर भी ये प्रशासन से पहले पहुँच जाते हैं। ऐसे युवाओं को सरकार की ओर से सम्मान मिलना चाहिए, क्योंकि ये गांव की सच्ची ताकत हैं।”
पालीघाट की यह युवा टीम सिर्फ काम नहीं करती, बल्कि समाज को यह संदेश देती है कि जब इरादा मजबूत हो, तो बदलाव किसी आदेश का इंतज़ार नहीं करता।
जब बात समाज और जनहित की हो — पालीघाट के युवा हमेशा सबसे आगे मिलेंगे।

EDITOR VS KHABAR
